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19 अक्टूबर को महाअष्टमी और महानवमी की पूजा, 20 अक्टूबर को विजयदशमी; इस बार नवरात्र में विशेष ज्योतिषीय संयोग

एक ही दिन अष्टमी-नवमी का संयोग, 20 अक्टूबर को दशहरा; जानिए कन्या पूजन से विसर्जन तक के मुहूर्त
देहरादून। आचार्य सुशांत राज ने बताया कि अष्टमी 18 अक्टूबर की सुबह शुरू होकर 19 अक्टूबर की सुबह समाप्त होगी। इसके बाद नवमी शुरू हो जाएगी, जो 20 अक्टूबर की दोपहर तक रहेगी। वहीं, 20 अक्टूबर को विजयदशमी यानी दशहरा मनाया जाएगा।
आचार्य सुशांत राज ने बताया कि अष्टमी तिथि 18 अक्टूबर को सुबह लगभग 8:27 बजे शुरू होगी और 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे तक रहेगी। उदया तिथि के आधार पर 19 अक्टूबर को महाअष्टमी का पूजन किया जाएगा। सोमवार, 19 अक्टूबर को अष्टमी तिथि सुबह 10:51 बजे तक रहने के कारण अष्टमी की तिथि में कन्या पूजन करने वाले श्रद्धालु सुबह के समय पूजा कर सकते हैं। कन्या पूजन के लिए सुबह लगभग 7:30 बजे से 10:30 बजे तक का समय रखा  है। अष्टमी तिथि 19 अक्टूबर को सुबह 10:51 बजे समाप्त होने के बाद नवमी तिथि प्रारंभ हो जाएगी। महानवमी का पूजन भी इसी दिन किया जा सकता है। नवमी तिथि 20 अक्टूबर को दोपहर लगभग 12:50 बजे तक रहेगी। नवमी के दिन मां सिद्धिदात्री की पूजा, हवन और कन्या पूजन किया जाता है। आचार्य सुशांत राज ने बताया कि वर्ष 2026 के शारदीय नवरात्र में गुरु के कर्क राशि में होने और चंद्रमा के साथ गजकेसरी योग बन रहा  है। ज्योतिषीय मान्यताओं में इस योग को शुभ माना जाता है।विजयदशमी का पर्व मंगलवार, 20 अक्टूबर को मनाया जाएगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यह दिन भगवान श्रीराम की रावण पर विजय और मां दुर्गा की महिषासुर पर विजय का प्रतीक है।
डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि 20 अक्टूबर को विजयदशमी के अवसर पर प्रमुख मुहूर्त अपराह्न पूजा मुहूर्त: दोपहर 1:10 से 3:26 बजे तक।दशहरे पर भाई का टीका करने का विजय मुहूर्त: दोपहर 1:56 से 2:41 बजे तक है इसी समय भाई को तिलक किया जायेगा।   गोर्खाली समाज के लिए दशहरा (दशै ) प्रमुख त्यौहार हैं गोर्खाली समाज  के लिए टीके का शुभ मुहूर्त 21 अक्टूबर दिन बुधवार को सुबह 07 बजकर 32  मिनट है जो पुरे दिन रहेगा जिसमे विशेष मुहूर्त 10 बजकर 26  मिनट है और इसके उपरांत विशेष  मुहूर्त 11 बजकर 23  मिनट है. डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि बड़ो से टीका और आशीर्वाद लेते समय पश्चिम दिशा की और मुँह करके बैठना अत्यंत शुभ है।