मौसम खराब होने से चंद्र दर्शन में बाधा, करवा चौथ का व्रत कैसे खोलें? डॉ आचार्य सुषांत राज ने बताई पूजा की विधि
देहरादून। करवा चौथ का पर्व सुहागिन महिलाओं के लिए विशेष धार्मिक और भावनात्मक महत्व रखता है। इस दिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और दांपत्य जीवन की खुशहाली की कामना के साथ निर्जला व्रत रखती हैं। पूरे दिन व्रत रखने के बाद महिलाओं को चंद्रोदय का इंतजार रहता है। परंतु मौसम खराब होने, आसमान में बादल छाए रहने और चंद्रमा दिखाई नहीं देने की स्थिति में महिलाओं के सामने यह सवाल खड़ा हो जाता है कि आखिर चंद्र दर्शन के बिना व्रत का पारण कैसे किया जाए।करवा चौथ पर चंद्रमा के दर्शन के बाद अर्घ्य देने और पूजा करने की परंपरा है। ऐसे में यदि मौसम साथ न दे और चंद्रमा बादलों के पीछे छिपा रहे, तो व्रत रखने वाली महिलाओं को चिंता होने लगती है। कई महिलाएं यह जानना चाहती हैं कि ऐसी परिस्थिति में उन्हें कितनी देर तक इंतजार करना चाहिए और चंद्रमा दिखाई न देने पर कौन सी धार्मिक विधि अपनाई जा सकती है। ऐसी स्थिति में डॉ आचार्य सुशांत राज ने दी जानकारी!
डॉ आचार्य सुशांत राज:मौसम खराब होने पर चंद्रमा का चित्र देखकर भी खोल सकते हैं करवा चौथ का व्रत, वीडियो कॉल से चंद्र दर्शन का विकल्प!
डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि मौसम खराब होने पर चंद्रमा का चित्र देखकर भी खोल सकते हैं करवा चौथ का व्रत, वीडियो कॉल से चंद्र दर्शन कर व्रत खोल सकते है।
साथ ही उन्होंने कहा कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, करवा चौथ की पूजा में चंद्रदेव की विशेष भूमिका होती है। यदि आसमान में बादल होने के कारण चंद्रमा के प्रत्यक्ष दर्शन नहीं हो पा रहे हों, तो सबसे पहले अपने शहर के निर्धारित चंद्रोदय समय की जानकारी लेनी चाहिए। चंद्रोदय का समय होने के बावजूद बादलों के कारण चांद नजर न आने पर जल्दबाजी करने के बजाय चंद्रमा का चित्र देखकर भी खोल सकते हैं करवा चौथ का व्रत, वीडियो कॉल से चंद्र दर्शन कर व्रत खोल सकते है!
ऐसी स्थिति मे पूजा के दौरान भगवान शिव, माता पार्वती और चंद्रदेव से परिवार की सुख-समृद्धि तथा पति की दीर्घायु की कामना की जाती है। कुछ धार्मिक परंपराओं में चंद्रमा के प्रतीकात्मक स्वरूप का पूजन करने का भी विकल्प अपनाया जाता है।
श्रद्धा और परंपरा के अनुसार करें पूजा
डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि करवा चौथ की पूजा में विधि-विधान के साथ श्रद्धा का भी विशेष महत्व माना जाता है। मौसम खराब होने की स्थिति में महिलाओं को अपने परिवार में प्रचलित परंपरा का पालन करना चाहिए। चंद्र दर्शन न होने पर व्रत खोलने की विधि को लेकर अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों में मान्यताएं भिन्न हो सकती हैं। चंद्रमा के दर्शन न हों, तो चंद्रोदय के निर्धारित समय पर चंद्रदेव का स्मरण करके पूजा और अर्घ्य देने के वैकल्पिक तरीके अपनाए जा सकते हैं। हालांकि, पूजा की विधि परिवार और परंपरा के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
डॉ आचार्य सुशांत राज ने बताया कि चंद्रमा दिखाई ना तो क्या करें!
अपने शहर में चंद्रोदय का निर्धारित समय बीतने तक प्रतीक्षा करें।
यदि चांद बादलों में छिपा रहे, तो थाली में सफेद चंदन से चंद्रमा की आकृति बनाकर उसके चारों ओर अक्षत और सफेद फूल रखें।
“ॐ चंद्राय नमः” और “ॐ सोमाय नमः” मंत्र का जाप करते हुए श्रद्धापूर्वक अर्घ्य दें।
भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा करें। इसके बाद अपने परिवार की परंपरा के अनुसार व्रत का पारण करें।

