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निकाय चुनाव में हार सामने देख तुष्टीकरण पर उतर आई है भाजपा : गरिमा मेहरा दसौनी

 देहरादून। भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व के द्वारा निकाय चुनाव हाथ से फिसलता देख लगातार तुष्टिकरण की नीति अपनाई जा रही है यह आरोप लगाया है उत्तराखंड की मुख्य प्रवक्ता गरिमा मेहरा दसौनी ने।
 दसौनी ने कहा कि शहरी निकाय चुनाव स्थानीय यानी लोकल मुद्दों पर लड़े जाने चाहिए लेकिन भारतीय जनता पार्टी को सिर्फ एक भाषा समझ में आती है और वह है नफरत की भाषा ।
दसौनी ने कहा कि यदि शहरी निकाय की चुनावी सभाओं में भाजपा के नेताओं  के भाषणों की समीक्षा की जाए तो उसमें लैंड जिहाद, थूक जिहाद ,मंदिर- मस्जिद, जुम्मे की नमाज, मुस्लिम यूनिवर्सिटी, इसके अलावा कुछ नहीं मिलेगा। गरिमा ने कहा कि निकाय के चुनाव में स्थानीय जनता की समस्याओं और उसके निदान की बात होनी चाहिए, कानून व्यवस्था,स्वास्थ्य,शिक्षा,सड़क, बिजली, नाली, खड़ंजा, सीसीटीवी कैमरा, हरित प्रदेश, नदियों पर्यावरण का संरक्षण, अपराध पर नकेल, स्थानीय जनता का जीवन स्तर कैसे सुधारा जाए, उनको कैसे मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएगी इसका विजन और रोड मैप रखा जाना चाहिए ।
गरिमा ने कहा कि सत्ता पक्ष की तो और भी जिम्मेदारी बनती थी कि वह अपना रिपोर्ट कार्ड और उपलब्धियां जनता के बीच प्रस्तुत करें परंतु  इसके इतर  सत्ता पक्ष के प्रत्याशियों की सार्वजनिक सभाओं में दिए जा रहे नफरती और तुष्टिकरण वाले वक्तव्यों की जितनी निंदा की जाए कम है।
भाजपा एक बार पुनः विधानसभा और लोकसभा चुनाव की तरह तमाम  हथकंडे अपनाने के बावजूद जब अपने प्रत्याशी की जीत सुनिश्चित नहीं कर पा रहे हैं और अपने ही दल से भीतर घात झेलना पड़ रहा है ,तो भाजपा के नेताओं को जिहाद याद आने लगा है। 
दसौनी ने कहा कि उत्तराखंड की देव तुल्य जनता को सत्ता रूढ़  दल से हिसाब मांगना होगा।
हिसाब स्मार्ट सिटी का, हिसाब नाबालीग बच्चियों के साथ हो रहे दुष्कर्मों का, दिनदहाड़े हत्या, लूट डकैतियों का और सरकारी धन की बंदर  बांट का।
जनता को यह समझना होगा कि यह भारतीय जनता पार्टी की रीति नीति है कि जब उसके पास गिनाने के लिए कोई विकास या उपलब्धि नहीं होती तो फिर वह हिंदू मुसलमान मजार कब्रिस्तान करने लगती है। गरिमा ने कहा कि काश सत्ता पक्ष जनता की सुध लेता जो उसने पिछले 10 15 सालों में कभी नहीं लि और जनता के मुद्दों पर चुनाव लड़ने का प्रयास करता।गरिमा ने कहा कि आज जनता इतनी समझदार हो गई है कि उसके समझ में आने लगा है कि जब भी लव जिहाद, थूक जिहाद जैसी घटनाएं प्रदेश में घटित हों तो यह तय होता है कि प्रदेश में कोई ना कोई चुनाव चल रहे हैं और सत्ता पक्ष हार की बौखलाहट में उसे मुद्दा बना रहा है।