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गिरनार की पांचवीं टोंक को संरक्षित जैन राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए

देहरादून। जूनागढ़ स्थित गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जैनों को पूजा के अधिकार से वंचित रखने का मामला एक जटिल धार्मिक और कानूनी मुद्दा है। यह मामला 22वें तीर्थंकर, भगवान नेमिनाथ के मोक्ष स्थल, गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर पूजा के अधिकार को लेकर है, जिसे जैन धर्म के अनुयायी अपना पवित्र स्थल मानते हैं। जैन समुदाय का दावा है कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर भगवान नेमिनाथ के चरण चिन्ह हैं और यह उनका पवित्र स्थान है, जहां उन्हें मोक्ष प्राप्त हुआ था.वे इस स्थान पर पूजा करने और धार्मिक अनुष्ठान करने का अधिकार चाहते हैं। जैन समुदाय का आरोप है कि उन्हें इस स्थान पर पूजा करने से रोका जा रहा है और उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
पूर्व घोषित कार्यक्रम के तहत आज सुबह भारतीय जैन मिलन ने गिरनार तीर्थ क्षेत्र की रक्षा एवं 2 जुलाई को भगवान् नेमिनाथ के निर्वांण कल्याणक पर्व पर गुजरात प्रशानन द्वारा जैन यात्रियों से अभद्र व्यवहार किया गया, उसके विरोध प्रदर्शन मे आज भारतीय जैन मिलन द्वारा जिलाधिकारी के माध्यम से गुजरात सरकार को ज्ञापन दिया गया। इस अवसर पर भारतीय जैन मिलन के मुख्य राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष नरेश चंद जैन द्वारा कहा गया कि  भारत गणराज्य का संविधान सभी नागरिकों को उनके धर्म के पालन की स्वतंत्रता प्रदान करता है, इसमें किसी को भी रोकने का अधिकार नहीं देता है। लेकिन गत 2 जुलाई 2025 को गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर, जिस स्थान से जैन धर्म के 22 वें तीर्थंकर नेमीनाथ जी मोक्ष गए,देश भर से आए हजारों जैन धर्मावलंबियों को उनके पूजा के अधिकार से वंचित रखा गया न ही भगवान का जयकारा बोलने दिया, न ही कोई द्रव्य आदि चढ़ाने दिया गया, न ही निर्वाण लड्डू चढ़ाने दिया गया।यहां तक कि पुलिस के द्वारा 10 से अधिक स्थानों पर चेकिंग की गई कि कोई भी चढ़ाने हेतु द्रव्य सामग्री न ले जाने दी गई बल्कि छीन ली गई। और महिलाओं के साथ भी अभद्रता की गई। जबकि, भारत सरकार के पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग तथा गुजरात राज्य गजेटियर, दोनों ने स्पष्ट रूप से यह प्रमाणित किया है कि गिरनार की पंचम टोंक मूलतः जैन तीर्थ है। यह केवल धार्मिक या ऐतिहासिक अपमान नहीं, बल्कि न्यायिक व्यवस्था के मुंह पर तमाचा है।  गुजरात उच्च न्यायालय ने 2005 में स्पष्ट आदेश दिया है कि पंचम टोंक पर कोई भी नया निर्माण न किया जाए। मांग है कि ASI और  राज्य सरकार गजेटियर के आदेश का पालन सुनिश्चित किया जाए और अवैध दत्तात्रेय की मूर्ति को हटाया जाए। गिरनार की पांचवीं टोंक को संरक्षित जैन राष्ट्रीय धरोहर घोषित किया जाए। अल्पसंख्यक जैन समाज ने मांग की कि गिरनार पर्वत की पांचवीं टोंक पर जैनों को पूजा के अधिकार से वंचित ना किया जाये।