UPCL ने किया स्पष्ट,बिजली दरों में 16% वृद्धि की सूचनाएं भ्रामक:निगम का काम आंकड़े भेजना, अंतिम निर्णय नियामक आयोग का
देहरादून।उत्तराखंड पावर कार्पोरेशन लिमिटेड (UPCL) ने हाल ही में बिजली दरों में भारी वृद्धि को लेकर प्रसारित सूचनाओं को गलत बताया है। निगम ने प्रदेश के उपभोक्ताओं और जनप्रतिनिधियों को आश्वस्त करते हुए स्पष्ट किया है कि बिजली दरों में 16% की वृद्धि का दावा भ्रामक है।
UPCL नहीं UERC के पास दर निर्धारण का अधिकार
UPCL ने साफ किया है कि बिजली दरों को बढ़ाने का अधिकार निगम के पास नहीं होता। राज्य में विद्युत दरों का निर्धारण केवल उत्तराखंड विद्युत नियामक आयोग (UERC) द्वारा किया जाता है। निगम का कार्य केवल वित्तीय आंकड़े आयोग के समक्ष प्रस्तुत करना है। दरों पर अंतिम मुहर जनसुनवाई और विस्तृत विश्लेषण के बाद ही लगती है।
16% का आंकड़ा नियमित टैरिफ वृद्धि नहीं
विद्युत दरों में जिस 16% वृद्धि का उल्लेख किया जा रहा है, निगम ने उसे तकनीकी बताया है। UPCL के अनुसार, यह नियमित टैरिफ वृद्धि नहीं है, बल्कि पूर्व वित्त वर्षों के समायोजन (True-up) से उत्पन्न एक वित्तीय आवश्यकता है। True-up वह प्रक्रिया है जिसमें आयोग द्वारा स्वीकृत ARR और वास्तविक ARR के बीच के अंतर का समायोजन किया जाता है। स्वीकृत ARR वह अनुमानित राशि है जिसे नियामक आयोग वित्त वर्ष की शुरुआत में बिजली वितरण कंपनी के लिए तय करता है। वास्तविक ARR वह कुल राशि है जो वित्त वर्ष खत्म होने के बाद कंपनी ने वास्तव में खर्च की होती है।
विशेष रूप से वर्ष 2024–25 के लिए आयोग ने अनुमानित ARR के आधार पर स्वीकृति प्रदान की थी, जबकि वास्तविक ARR अधिक निकली। इस अंतर की पूर्ति के लिए लगभग 13.59% समायोजन की आवश्यकता हुई। यदि UPCL को उसके वैधानिक दावे समय पर प्राप्त हो जाते, तो यह अंतर उत्पन्न ही नहीं होता और 16% जैसा कोई आंकड़ा सामने नहीं आता। इसलिए इस तकनीकी समायोजन को नई दर वृद्धि के रूप में प्रस्तुत करना सही नहीं है।
केवल 2.64% की वृद्धि का सामान्य टैरिफ प्रस्ताव
वास्तव में वर्ष 2026-27 के लिए UPCL ने केवल 2.64% की सामान्य टैरिफ वृद्धि का प्रस्ताव रखा है। प्रसारित सूचनाओं में चर्चित बड़ा आंकड़ा केवल तकनीकी गणना का हिस्सा है, जिसे उपभोक्ताओं पर लागू होने वाली नई दर मानना गलत है।
UPCL ने सूचित किया है कि टैरिफ से संबंधित संपूर्ण प्रस्ताव 10 दिसंबर 2025 तक आयोग के समक्ष दायर किए जाएंगे। इसके बाद पारदर्शी प्रक्रिया के तहत आम नागरिकों और उपभोक्ता संगठनों से आपत्तियां व सुझाव मांगे जाएंगे। प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में जनसुनवाई आयोजित की जाएगी।
आयोग सभी तकनीकी विवरणों का परीक्षण कर उपभोक्ता हितों को ध्यान में रखते हुए ही अंतिम आदेश जारी करेगा।
