श्रम सहिताओं के विरोध, ट्रेड यूनियनो ने किया प्रदर्शन
देहरादून। श्रम सहिताओं के विरोध व एम एस पी कि गारंटी को लेकर उत्तराखंड संयुक्त ट्रेड यूनियन संघर्ष समिति व संयुक्त किसान मौर्चा ने गाँधी पार्क पर एकत्रित हो कर का विरोध प्रदर्शन कर प्रधानमंत्री का पुतला फूंका। आज सीटू, ऐटक, इंटक उत्तराखण्ड किसान सभा ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया इस अवसर पर सीटू व किसान सभा ने सीटू कार्यालय से जलूस के रूप मे गाँधी पार्क पहुंचे व वहाँ मौजूद ऐटक इंटक के साथ मिल कर विरोध नारेबाजी करते हुए जन सभा की। इस अवर पर सीटू के प्रांतीय अध्यक्ष राजेंद्र सिंह नेगी, प्रांतीय सचिव लेखराज, इंटक के प्रांतीय महामंत्री पंकज क्षेत्रीय, जिलाध्यक्ष अनिल कुमार, ऐटक के प्रांतीय महामंत्री अशोक शर्मा, उपाध्यक्ष समर भंडारी उत्तराखण्ड किसान सभा के प्रांतीय अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंह सजवाण, महामंत्री गंगाधर नौटियाल, सीटू के जिलाध्यक्ष अध्यक्ष एसएस नेगी बस्ती बचाओ आंदोलन के संयोजक अनंत आकाश, आल इण्डिया लॉयर्स यूनियन के प्रांतीय महामंत्री शम्भू प्रसाद मामगाई ने विचार व्यक्त किये।
इस अवसर पर वक्ताओ ने कहा कि नरेंद्र मोदी द्वारा 2020 में विपक्षी सांसदों कि गैर मौजूदगी मे 44श्रम कानूनो मे से 29 श्रम कानूनों के स्थान पर मजदूर विरोधी 4 श्रम सहिताये बनाई गयी जिसे केंद्र कि मोदी सरकार द्वारा 21 नवंबर 2025 को लागु कि गयी है। इन श्रम संहिताओं के लागू होने से मजदूरों के सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे और मजदूरों को गुलाम बनाने का ही प्रयास है वक्ताओ ने कहा कि वही किसनो को फ़सल कका न्यूनतम समर्थन मूल्य कि गारंटी के वायदे से सरकार पीछे हट रही है जिससे किसानों मे व्यापक विरोध है। इस अवसर पर चारों श्रम संहिताएं लागु करने के खिलाफ विरोध स्वरूप प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का पुतला फूंका इस अवसर पर जबरदस्त नारेबाजी कि गयी। वक्ताओ ने चारों श्रम संहिताओं को काला कानून बताया, इससे पूंजीपतियों व मालिकों को फायदा और श्रमिकों के अधिकार समाप्त हो जाएंगे जोर-जोर से जिसका प्रसार किया जा रहा है कि श्रम संहिताओं के लागू होने से को फायदा होगा जिसमें 1 वर्ष में ग्रेजुएट देना शामिल है जबकि भक्तों ने कहा कि एक तरफ फिक्स टर्म एम्प्लोयिमेंट जो कि कभी भी एक वर्ष पूरा नहीं होगा ओर वर्कर्स को ग्रेजुएटी नहीं मिल पायेगी वही ट्रेड यूनियन बनाने के नियम इस तरह बनाये गए है कि मजदूर अपनी यूनियन नहीं बना पायेगा, हड़ताल के अधिकार को भी लगभग समाप्त कर दिया गया है। वक्ताओ ने कहा कि मजदूर इन श्रम सहिताओं के खिलाफ व्यापक आंदोलन करेगा ओर इस सरकार को इन श्रम सहिताओं को वापस लेने के लिए मजबूर करेगा। इस अवसर पर किसान नेता शिवप्रसाद देवली,सीटू उपाध्यक्ष भगवंत सिंह पयाल, राजेंद्र पुरोहित, सीटू के सचिव अभिषेक भंडारी, श्रीमती प्रेमा,बैंक कर्मचारी यूनियंस के एस. एस. रजवार,किरण यादव, सोनू कुमार, महेन्द्र सिंह ,बलबीर ,उमैंश बोहरा ,प्रभा देवी, शिवा दुबे, सुनीता चौहान, अर्जुन रावत ,हरीश कुमार,नरेंद्र सिंह, रामप्रसाद मिश्रा, जनवादी महिला समिति कि उपाध्यक्ष नुरेशा अंसारी,किसान नेता जगदीश कुड़ियाल,मेडिकल रिपैंजन्टैटिव यूनियन सहित कई यूनियनो के सदस्य उपस्थित थे।
