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आजादी के आन्दोलन के मुक्ति योध्दा राजा महेन्द्र प्रताप सिंह : अनन्त आकाश 

देहरादून। स्वतंत्रता संग्राम सेनानी राजा महेंद्र प्रताप सिंह का जन्म 1 दिसंबर 1886 को हुआ था। उनका जन्म स्थान हाथरस, उत्तर प्रदेश (तत्कालीन संयुक्त प्रांत) में था।
 राजा महेन्द्र प्रताप सिंह  एक प्रमुख स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, लेखक और सामाजिक कार्यकर्ता थे। 1915 में उन्होंने अफगानिस्तान में पहली भारतीय निर्वासित सरकार (आजाद हिंद सरकार) की स्थापना की और उसके अध्यक्ष बने। उन्होंने देश की आजादी के लिए विदेशों में भी सक्रिय रूप से काम किया और शिक्षा के क्षेत्र में भी उल्लेखनीय योगदान दिया।
आजादी के आन्दोलन की स्वर्णिम परम्पराओं के वाहक के रूप में देहरादून का अपना महत्वपूर्ण स्थान है ,इसी कड़ी मे राजा महेंद्र प्रताप सिंह का नाम भी शामिल है । महेंद्र प्रताप कामरेड लेनिन के अनन्य मित्रों में से एक थे ,जो कि वामपंथी विचारधारा को न केवल अच्छा मानते थे ,अपितु अपने देश में समाजवादी व्यवस्था के प्रबल समर्थक थे ।अंग्रेजी हुकूमत उन्हें गिरफ्तार कर  भारत लाना चाहती उन्होंने लगभग 32 साल जापान मे निर्वासित जीवन व्यतीत किया ।1886 में एक बालक पैदा होता है जिसको 3 साल की उम्र में हाथरस के राजा-जमींदार हरनारायण सिंह गोद लेते हैं। वही बालक आगे चलकर एक कांग्रेसी बनता है फिर एक राइटर, एक पत्रकार और क्रांतिकारी देशभक्त । देश के लिए अपनी उच्च शिक्षा त्याग देता है और देश को आज़ाद कराने के लिए ऐशो-आराम  छोड़कर  एक समाजवादी राष्ट्र बनाने का सपना लिए दर ब दर भटकता रहता है। अपने 28 वें जन्मदिन पर वो  सुदूर अफगानिस्तान के काबुल में एक निर्वासित सरकार बनाता है स्वयं राष्ट्रपति बनता है और एक मुसलमान मौलवी वरकतुल्लाह को अपना प्रधानमंत्री बनाता है। 
वे जाट विरादरी राजा महेंद्र प्रताप लेनिन के मित्र थे। सोवियत सरकार से बाबस्ता था उनका। वो हिंदुस्तान में भी एक समाजवादी सरकार बनाना चाहते थे। सांप्रदायिकता जाति-पात के कट्टर विरोधी थे। अंग्रेजों ने उन पर जिंदा या मुर्दा लाने पर लाखों का इनाम रखा। वे 1925 में जापान चले गए और 32 साल बाद 1946 में भारत लौटे।
राजा महेंद्र प्रताप सिंह कांग्रेस की नीतियों से सहमत नही थे ,वे एक वामपंथी विचारक थे और समाजवादी राष्ट्र की कल्पना करते थे।1957 में मथुरा संसदीय सीट से वे निर्दलीय चुनाव लड़े और जनसंघ के अटल बिहारी बाजपेयी को हराया। अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय के संस्थापक सर सैयद अहमद खान के बरक्स खड़ा कर रहें हैं। वे नही जानते कि राजा महेंद्र प्रताप सिंह की आरंभिक शिक्षा उसी मोहम्मडन एंग्लो-ओरिएंटल कॉलेजिएट स्कूल में हुई, जो बाद में अलीगढ़ विश्वविद्यालय बना।