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‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म) का शुभारंभ 

देहरादून। शुक्रवार को राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) ने लोक भवन में ‘भारत हिमालयन इंटरनेशनल स्ट्रैटेजिक मंच (भीष्म)’ का शुभारंभ किया। इस अवसर पर राज्यपाल ने भीष्म का लोगो और वेबसाइट का भी अनावरण किया। भीष्म एक रणनीतिक थिंक टैंक है, जो देहरादून में स्थित बौद्धिक संसाधनों को एकत्रित कर उत्तराखण्ड राज्य को देश में रणनीतिक चिंतन के अग्रणी केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। इस मंच की संस्थापक टीम का नेतृत्व, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ, जनरल अनिल चौहान और उनके साथ लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि), सदस्य, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड, जुड़े हैं, जो विविध क्षेत्रों के समृद्ध ज्ञान और व्यापक अनुभव को एक मंच पर लाए हैं। भीष्म के अन्य प्रमुख सदस्यों में कर्नल (डॉ.) गिरिजा शंकर मुंगली (से नि), श्री संजीव चोपड़ा, आईएएस (से नि), प्रो. दुर्गेश पंत, प्रो. दीवान सिंह रावत, प्रो. सुरेखा डंगवाल, नितिन गोखले तथा राजन आर्य शामिल हैं। थिंक टैंक के शुभारंभ के अवसर पर राज्यपाल ने कहा कि देहरादून में ‘भीष्म’ थिंक टैंक की शुरुआत उत्तराखण्ड तथा पूरे राष्ट्र के लिए गौरव का विषय है। उन्होंने कहा कि यह मंच राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक चिंतन के क्षेत्र में एक प्रभावशाली थिंक टैंक के रूप में स्थापित होगा। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड की भौगोलिक स्थिति हमें विशेष जिम्मेदारी प्रदान करती है, क्योंकि राज्य की दो अंर्तराष्ट्रीय सीमाएँ हैं। हिमालय की यह भूमि सदैव राष्ट्र सुरक्षा, साहस और कर्तव्यनिष्ठा की प्रेरणा देती रही है। ऐसे परिप्रेक्ष्य में ‘भीष्म’ राष्ट्रीय हित, राष्ट्रीय सुरक्षा तथा रणनीतिक नीति-निर्माण से जुड़े विषयों पर गंभीर और समावेशी विमर्श का मंच बनेगा। उन्होंने लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि) द्वारा इस पहल को आगे बढ़ाने के प्रयासों की सराहना की तथा चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान के मार्गदर्शन और सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। राज्यपाल ने कहा कि इस विचार को धरातल पर उतारने में इनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है। राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड में भारत सरकार की अनेक प्रतिष्ठित संस्थाएँ कार्यरत हैं, ये संस्थाएँ राष्ट्र निर्माण, प्रशासनिक नेतृत्व और सैन्य परंपरा को सुदृढ़ करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती रही हैं। ‘भीष्म’ इन संस्थानों की बौद्धिक क्षमता और अनुभव को समेकित करते हुए सामूहिक उत्तरदायित्व की भावना से राष्ट्र सुरक्षा के लिए कार्य करेगा। शुभारंभ के अवसर पर विशिष्ट अतिथि चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने “फ्रंटियर्स, बॉर्डर्स एंड एलएसीः द मिडिल सेक्टर” विषय पर व्याख्यान दिया। उन्होंने विशेष रूप से मध्य सेक्टर में हिमालयी सीमाओं के बढ़ते महत्व तथा सरकार द्वारा अवसंरचना विकास पर दिए जा रहे विशेष बल पर प्रकाश डाला। सीडीएस ने कहा कि गंगा और यमुना के पावन उद्गम स्थल, केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री जैसे दिव्य धाम, तपस्वियों की साधना और गहन दार्शनिक परंपराओं ने उत्तराखण्ड को अद्वितीय गरिमा प्रदान की है। यह केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं, बल्कि चेतना, संस्कृति और सभ्यता का जीवंत केंद्र है। इसी संदर्भ में ‘भीष्म’ जैसे एक रणनीतिक थिंक टैंक के लिए उत्तराखण्ड अत्यंत उपयुक्त स्थल है। हिमालय की गोद में स्थापित कोई भी चिंतन संस्थान स्वाभाविक रूप से ऐसी रणनीतिक दृष्टि विकसित कर सकता है, जो भू-परिस्थितियों के प्रति सजग, तंत्र-समन्वित और दीर्घकालिक दृष्टिकोण से युक्त हो। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन, जल सुरक्षा, सीमा प्रबंधन, सैन्य आधुनिकीकरण, आपदा प्रबंधन जैसे सभी विषयों पर हिमालयी दृष्टि एक समग्र और संतुलित सोच प्रदान कर सकती है। यहाँ से उपजा चिंतन केवल क्षेत्रीय न रहकर राष्ट्रव्यापी प्रभाव उत्पन्न कर सकता है, जैसे गंगा की अविरल धारा पर्वतों से निकलकर पूरे देश को जीवन और नई दिशा प्रदान करती है। लेफ्टिनेंट जनरल अजय कुमार सिंह (से नि) ने इसके उद्देश्य के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि भीष्म हिमालयी क्षेत्र से संबंधित रणनीतिक विषयों पर भारत सरकार को परामर्श प्रदान करेगा तथा देहरादून और उसके आसपास स्थित शैक्षणिक एवं अन्य संस्थानों के साथ समन्वय स्थापित करेगा। इसके पहले मध्य कमान (लखनऊ) के जीओसी-इन-सी लेफ्टिनेंट जनरल अनिंद्य सेनगुप्ता ने उद्घाटन भाषण दिया। प्रारंभिक संबोधन के पश्चात श्री संजीव चोपड़ा, आईएएस (से नि) ने अपने विचार व्यक्त किए। इस कार्यक्रम में विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े अनेक गणमान्य लोग, चिंतक, विचारक और सेना के अधिकारी और पूर्व सैन्य अधिकारी मौजूद रहे।