भाजपा की कथनी और करनी के बीच का अंतर पूरी तरह उजागर
देहरादून। पूर्व अध्यक्ष उत्तराखंड कांग्रेस एवं की सीडब्लूसी सदस्य करन माहरा ने कहा कि उत्तराखंड में हुए हालिया मंत्री विस्तार ने भाजपा की कथनी और करनी के बीच का अंतर पूरी तरह उजागर कर दिया है। एक तरफ पार्टी खुद को “कार्यकर्ता आधारित संगठन” बताकर अपने समर्पित कार्यकर्ताओं से वर्षों तक मेहनत करवाती है, उन्हें संघर्ष, निष्ठा और त्याग का पाठ पढ़ाती है, वहीं दूसरी तरफ जब सत्ता में भागीदारी देने की बात आती है तो उन्हीं कार्यकर्ताओं को किनारे कर दिया जाता है। जो कार्यकर्ता सालों तक दरी बिछाते रहे, पोस्टर लगाते रहे, चुनावों में दिन-रात जुटे रहे, आज वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं। उनकी जगह उन नेताओं को मंत्री बनाया जा रहा है जिनकी जड़ें कभी कांग्रेस में रही हैं। यह न केवल कार्यकर्ताओं के साथ अन्याय है, बल्कि भाजपा के मूल चरित्र पर भी सवाल खड़ा करता है।
यह साफ दिखता है कि भाजपा को अब अपने ही कैडर पर भरोसा नहीं रहा, इसलिए वह बाहर से आए नेताओं पर ज्यादा निर्भर होती जा रही है। सत्ता के लालच में पार्टी अपने सिद्धांतों से समझौता कर रही है और समर्पित कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर रही है। इससे कार्यकर्ताओं का मनोबल गिर रहा है और संगठन के अंदर असंतोष बढ़ रहा है। जिस पार्टी की ताकत उसका जमीनी कार्यकर्ता होता है, जब वही खुद को उपेक्षित महसूस करने लगे तो यह संगठन के लिए खतरे की घंटी है। भाजपा को यह समझना होगा कि केवल नारों और दावों से संगठन नहीं चलता, बल्कि कार्यकर्ताओं के सम्मान और विश्वास से चलता है और फिलहाल यही दोनों चीजें भाजपा अपने ही लोगों से छीनती नजर आ रही है।
