बारिश और लैंडस्लाइड ने उत्तराखंड में मचाई भारी तबाही
हरिद्वार में हाईवे पर धंसी पुलिया, पानी में फंसी बस
मौसम विभाग ने 14 जुलाई तक का मौसम का पूर्वानुमान जारी किया
मानसून की बारिश बनी आफत : मसूरी में गिरा 100 साल पुराना खाखसी प्रजाति का पेड़
राज्य के पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी
देहरादून। मौसम विज्ञान केंद्र देहरादून ने उत्तराखंड में बारिश की संभावना जताई हुई है। देर रात से हो रही मूसलाधार बारिश से हरिद्वार का आम जनजीवन प्रभावित हो गया। बारिश ने हरिद्वार में जलनिकासी व्यवस्था की भी पोल खोल दी। सुबह शहर के कई प्रमुख चौराहे जलमग्न हो गए, जिससे यातायात प्रभावित रहा और लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। हरिद्वार के भगत सिंह चौक पर दो से तीन फीट तक पानी भर गया। वहीं चंद्राचार्य चौक और सिटी अस्पताल के बाहर भी जलभराव होने से लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। कई दुकानों में भी बारिश का पानी घुसने से व्यापारियों को नुकसान हो गया। साथ ही दुकानों के बाहर खड़े वाहन भी आधे पानी में डूबते नजर आए। भगत सिंह चौक के पास रेलवे ओवरब्रिज के नीचे एक निजी बस फंस गई.चंद्राचार्य चौक के पास एक कार पानी में बंद हो गई। लिहाजा कार सवारों ने धक्का लगाकर कार को पानी से बाहर निकाला। इसके अलावा दोपहिया वाहन बीच पानी में ही बंद हो गए। जलभराव के कारण फैक्ट्री और कॉलेज जाने वाले लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हालांकि इस क्षेत्र में निगम प्रशासन ने बरसात से पहले ही साफ सफाई कराई थी लेकिन यहां जलभराव की समस्या करीब तीस साल पुरानी है। जिसका आज तक स्थाई समाधान नहीं हो पाया. यहां से भेल क्षेत्र के बड़े नाले में पानी आता है और सीधा गंगा में पानी की निकासी होती है। जल निकासी के लिए चंद्राचार्य चौक पर पंप लगाए गए हैं लेकिन तेज बारिश में पंप भी काम नहीं कर सके। जिसके चलते लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ा। हरिद्वार में बारिश के चलते कनखल के लाटोवाली क्षेत्र में भी यही स्थिति देखने को मिली। यहां सड़कों पर करीब तीन फीट तक पानी भर गया। यहां पानी भरने से लोगों की आवाजाही बंद हो गई। घरों के बाहर खड़े वाहन भी आधे डूबे नजर आए। यहां भी जलभराव की समस्या वर्षों पुरानी है, जिसका स्थाई समाधान आज तक नहीं हो पाया. इसके साथ ही ज्वालापुर क्षेत्र में भी बाजार में पानी भर गया। पुरानी बनी दुकानों में अंदर तक पानी घुस गया. जिसके चलते दुकानदारों को नुकसान की आशंका है. ज्वालापुर शहर का मुख्य बाजार है। आबादी बढ़ने के साथ यहां जलनिकासी की व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया गया और ड्रेनेज प्लान की मांग आज भी अधूरी है. हरिद्वार नजीबाबाद मार्ग पर गैंडीखाता क्षेत्र में पेट्रोल पंप के सामने बनी पुलिया का एक हिस्सा अचानक धंस गया। एनएचएआई के द्वारा अभी हाल ही में इस पुलिया निर्माण कराया गया था। घटना के समय मार्ग से गुजर रही उत्तराखंड रोडवेज की एक बस पुलिया के धंसने से उसमें फंस गई, बस में सवार दर्जनों यात्रियों में अफरा तफरी का माहौल बन गया। चालक की सूझबूझ से बस को पुलिया से बाहर निकाला गया। लेकिन बस के टायर क्षतिग्रस्त हो गए। घटना के बाद क्षेत्र में यातायात प्रभावित रहा. सूचना मिलने पर संबंधित विभाग के अधिकारी मौके पर पहुंचे और बस को साइड में लगाकर यातायात सुचारू कराया। फिलहाल सड़क के आधे हिस्से से आवाजाही कराई जा रही है. बारिश बंद होने के बाद पुलिया की मरम्मत का कार्य शुरू किया जाएगा।
मौसम विभाग के अनुसार राज्य के पांच जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। इन जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है। इसके अलावा बाकी जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होने की संभावना जताई है। इन जिलों में येलो अलर्ट है। इधर बारिश और लैंडस्लाइड ने उत्तराखंड में भारी तबाही मचाई है। मसूरी में 100 साल पुराना पेड़ गिर गया। उत्तरकाशी में सड़कों के खुलने और बंद होने का सिलसिला जारी है। मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड के देहरादून, हरिद्वार, उधम सिंह नगर, नैनीताल और चंपावत जिलों में कहीं-कहीं भारी से बहुत भारी बारिश होगी। राज्य के बाकी बचे 8 जिलों में कहीं-कहीं भारी वर्षा होगी. इस दौरान बादल जोर से गरजेंगे और बिजली भी चमकेगी। मौसम विभाग ने शुक्रवार 10 जुलाई के लिए पांच जिलों में ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट रहेगा। मौसम विभाग ने 14 जुलाई तक का मौसम का पूर्वानुमान जारी किया है। पूर्वानुमान के अनुसार इन सभी दिनों में राज्य में बारिश होगी। इसके साथ ही मौसम विभाग ने संवेदनशील इलाकों में कहीं-कहीं मध्यम भूस्खलन और चट्टान गिरने की आशंका भी जताई है। राजमार्गों में अवरोध और कटाव हो सकता है। इस दौरान बिजली गिरने का आशंका भी है। पहाड़ों की रानी मसूरी में लगातार हो रही बारिश के बीच एक बड़ा हादसा टल गया। अपर माल रोड स्थित बेकरी हिल के पास अचानक 100 साल पुराना एक विशालकाय पेड़ भरभराकर सड़क पर गिर पड़ा। पेड़ की चपेट में एक कार और सड़क किनारे खड़ी तीन स्कूटी आ गईं। राहत की बात यह रही कि घटना के समय किसी वाहन में कोई सवार नहीं था, जिससे बड़ी जनहानि टल गई। जो पेड़ गिरा वो खाखसी प्रजाति का बताया गया है। पेड़ गिरते ही अपर माल रोड पर अफरा-तफरी मच गई. सड़क पूरी तरह अवरुद्ध हो गई और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। पर्यटक और स्थानीय लोग काफी देर तक जाम में फंसे रहे। घटना की सूचना मिलते ही मसूरी पुलिस, फायर सर्विस और वन विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंची और संयुक्त अभियान शुरू किया। भारी-भरकम पेड़ को हटाना आसान नहीं था. फायर सर्विस के जवानों ने कटर मशीन की मदद से पेड़ की मोटी शाखाओं और तने को कई हिस्सों में काटा, जबकि पुलिस ने मौके पर यातायात को नियंत्रित किया और वन विभाग की टीम ने पेड़ को सुरक्षित तरीके से हटाने में सहयोग किया।करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद सड़क से पेड़ हटाया गया और यातायात को फिर से सुचारू कराया गया। फायर सर्विस के अधिकारी प्रदीप कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही टीम तुरंत मौके पर पहुंच गई थी। मसूरी पुलिस और वन विभाग के सहयोग से पेड़ को काटकर हटाया गया, जिसके बाद यातायात सामान्य हो सका। वहीं वन दरोगा ने बताया कि लगातार बारिश के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में बड़े और पुराने पेड़ों के गिरने का खतरा बढ़ जाता है। विभाग ऐसे संवेदनशील पेड़ों को चिन्हित करने का अभियान चला रहा है। समय-समय पर बड़े पेड़ों की लॉपिंग (शाखाओं की कटाई) की अनुमति भी दी जाती है, ताकि दुर्घटनाओं की आशंका कम हो सके। इसके अलावा सड़क किनारे जर्जर और खतरे की स्थिति में खड़े पेड़ों को हटाने के लिए भी उच्च अधिकारियों को लगातार प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं।
उत्तरकाशी जनपद में भी बारिश जमकर कहर बरपा रही है। गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग नालूपानी के पास भारी मलबा और भूस्खलन आने से अवरुद्ध हो गया। यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग स्यानाचट्टी के समीप भूस्खलन के कारण बंद हो गया। दोनों मार्गों को खोलने के लिए संबंधित विभागों की टीमें युद्धस्तर पर राहत एवं बहाली कार्य में जुटी हुई हैं। वहीं लगातार खराब मौसम को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने पूरे जिले में हाई अलर्ट घोषित करते हुए सभी विभागों को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। गंगोत्री हाईवे पर नालूपानी के पास पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आने से यातायात रोकना पड़ा। हालांकि अभी नालूपानी के पास हाईव खोल दिया गया, लेकिन पहाड़ी से लगातार बोल्डर आने के बावजूद यात्री जान जोखिम में डाल कर जा रहे हैं। दूसरी ओर स्यानाचट्टी के समीप यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग भी भूस्खलन की चपेट में आ गया। राष्ट्रीय राजमार्ग बड़कोट और संबंधित एजेंसियों की टीमें जेसीबी मशीनों की मदद से लगातार मलबा हटाने के कार्य में लगी हुई हैं। जिले में लगातार हो रही वर्षा और मौसम विभाग की चेतावनी को देखते हुए जिलाधिकारी प्रशांत आर्या ने आपदा प्रबंधन से जुड़े सभी विभागों को हाई अलर्ट पर रहने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें ताकि किसी भी आपात स्थिति से तत्काल निपटा जा सके। जिलाधिकारी ने विशेष रूप से भूस्खलन संभावित स्थानों पर पर्याप्त मैनपावर और जेसीबी मशीनों की अग्रिम तैनाती सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं, जिससे मार्ग अवरुद्ध होने की स्थिति में उन्हें शीघ्र खोला जा सके तथा आवश्यकता पड़ने पर राहत एवं बचाव कार्य तुरंत शुरू किया जा सके।
