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  • * आखिरकार मान गए ऊर्जा कर्मी, समाधान का आश्वासन.
  • * सरकारी नौकरी की चाह रखने वाले युवाओं के लिए अच्छी खबर.
  • * कोरोना संक्रमण में कमी को देखते हुए सरकारी कार्यालय शत-प्रतिशत उपस्थिति के साथ खोलने के निर्देश.
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  • * मध्यरात्रि से यूपीसीएल, यूजेवीएनएल, पिटकुल में बेमियादी हड़ताल शुरू करने का एलान किया.
  • * मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पूजा-पाठ के बाद सरकारी आवास में शिफ्ट.
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  • * IAS दीपक रावत ने संभाला ऊर्जा निगम और पिटकुल के प्रबंध निदेशक का पदभार.
  • * समाजवादी पार्टी ने दून जिला कार्यकारिणी का विस्तार किया.
  • * आइएएस दीपक रावत ने छह दिन बीतने पर भी ऊर्जा निगम के प्रबंध निदेशक का पदभार नहीं संभाला.
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हरिद्वार सांसद ने की राज्यपाल से मुलाकात      

    देहरादून 18 अगस्त। राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (से नि) से मंगलवार को लोक भवन में पूर्व मुख्यमंत्री एवं हरिद्वार सांसद त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर उन्होंने विभिन्न समसामयिक विषयों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में आर्थिकी को मजबूत करने और स्थानीय संसाधनों के बेहतर उपयोग के संबंध में राज्यपाल से चर्चा की।राज्यपाल ने कहा कि उत्तराखण्ड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय संसाधनों का वैज्ञानिक, तकनीकी और पर्यावरणीय दृष्टि से उचित उपयोग ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने, रोजगार के अवसर बढ़ाने तथा पलायन को रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। उन्होंने इस दिशा में विश्वविद्यालयों और शोध संस्थानों के माध्यम से संभावनाओं का अध्ययन एवं व्यावहारिक मॉडल विकसित करने पर बल दिया। इस अवसर पर श्री रावत ने कहा कि उत्तराखण्ड में उपलब्ध पिरूल, गोबर तथा अन्य जैविक अपशिष्टों को केवल अपशिष्ट न मानकर आर्थिक संसाधन के रूप में विकसित करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि जंगलों में बड़ी मात्रा में उपलब्ध पिरूल का वैज्ञानिक एवं तकनीकी तरीके से उपयोग कर ऊर्जा उत्पादन सहित विभिन्न क्षेत्रों में इसका इस्तेमाल किया जा सकता है। इससे वनाग्नि के जोखिम को कम करने के साथ-साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार एवं आय के अवसर भी सृजित किए जा सकते हैं।  उन्होंने गोबर के बहुआयामी उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की। उन्होंने बताया कि गोबर से बायोगैस एवं जैव-उर्वरक जैसे उत्पादों के साथ-साथ आधुनिक तकनीक और शोध के माध्यम से इसमें मौजूद सेल्यूलोज, लिग्निन जैसे घटकों का उपयोग मूल्यवर्धित उत्पाद तैयार करने में किया जा सकता है। उन्होंने सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) से निकलने वाले अवशेषों के वैज्ञानिक प्रबंधन और उपयोग की संभावनाओं पर भी चर्चा की।