इस बार कुंभ बनेगा धर्म नगरी में हरित क्रांति की मिसाल,लगाए जायेंगे 18 लाख पौधे
हरिद्वार। वर्ष 2021 में कोरोना के चलते हरिद्वार कुंभ मेले को बीच में ही स्थगित कर दिया गया था। जिसके बाद अब उत्तराखंड सरकार 2027 अर्द्धकुंभ मेले को पूर्ण कुंभ की तर्ज पर आयोजित करने जा रही है। एक साल पहले सभी तरह अखाड़ों ने भी इस पर सहमति जता दी है। कुंभ मेले की तैयारियों के बीच इस बार हरिद्वार को हरित और पर्यावरण के अनुकूल बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ग्रीन कुंभ की थीम के तहत शहर के चौक चौराहों से लेकर हाईवे और डिवाइडरों पर हरियाली लगाने की योजना पर काम किया जा रहा है। प्रमुख स्थानों पर मिनी गार्डन तैयार किए जा रहे हैं। गंगनहर किनारे ग्रीन लैंड जबकि डिवाइडरों के बीच ऐसे पौधे लगाए जा रहे हैं, जो लंबे समय तक हरे भरे रहें। इसके साथ ही शहर के सौंदर्यीकरण के लिए विभिन्न स्थानों पर पेड़ पौधे लगाने के साथ ही पेंटिंग का काम भी किया जा रहा है। नए घाटों के निर्माण के लिए शुरुआत में ही निर्माण कार्यों के दौरान पेड़ों की कटाई को लेकर उठे सवालों के बीच मेला प्रशासन ने कार्यदायी संस्थाओं को कम से कम पेड़ काटने के निर्देश दिए थे। जिन स्थानों पर निर्माण की जरूरत के चलते पेड़ काटे गए हैं, वहां नियमानुसार नए पौधे लगान जा रहे हैं। ग्रीन कुंभ की थीम पर पिछले पांच जून पर्यावरण दिवस से ही काम शुरू हो गया था। पूरे हरिद्वार जनपद में करीब 18 लाख पेड़ पौधे लगाने का लक्ष्य निर्धारित कर सभी विभागों की जिम्मेदारी तय की गई थी. अकेले हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण को ही करीब एक लाख पौधे लगाने का जिम्मा सौंपा गया है। शहर में हरियाली बढ़ाने के लिए खुले मैदानों और अन्य उपयुक्त स्थानों पर पौधे लगाए जा रहे हैं। चौक चौराहों और डिवाइडरों को नए सिरे से बनाकर कर उनमें पेड़ लगाने के लिए क्यारियां तैयार की जा रही हैं। सामाजिक और धार्मिक संस्थाओं को भी पौधरोपण और उनकी देखभाल से जोड़ने की तैयारी है। हालांकि डिवाइडरों की चौड़ाई को लेकर लोगों ने विरोध भी दर्ज कराया। जिसके बाद मेला प्रशासन ने लोगों की बात मानी और चौड़ाई कम करने का निर्णय लिया। कुंभ मेले में आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं को देखते हुए शहर की हरियाली, स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण को लेकर किए जा रहे इन प्रयासों को महत्वपूर्ण माना जा रहा है, लेकिन पर्यावरण प्रेमी और साधु संतों ने लगाए गए पौधों की नियमित देखभाल और उन्हें पेड़ बनने तक सुरक्षित करने की जिम्मेदारी तय करने की बात कही है.कुंभ मेलाधिकारी सोनिका ने बताया कुंभ मेले के कार्य करने वाली सभी कार्यदायी संस्थाओं को कम से कम पेड़ काटने के निर्देश दिए गए हैं. कहीं जरूरत पड़ने पर पेड़ काटे भी गए हैं तो, उनकी जगह नियमों के अनुसार नए पौधे लगाने का कार्य किया जाए। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के साथ मिलकर कुंभ मेले की तैयारियों के साथ पर्यावरण के अनुकूल पेड़ लगाए जा रहे हैं। हरिद्वार रुड़की विकास प्राधिकरण के सचिव प्रत्युष सिंह ने बताया कुंभ मेले की तैयारियों के बीच हरिद्वार के सभी चौक चौराहों का सौंदर्यकरण किया जा रहा है। शहर से लेकर हाइवे तक पेड़ पौधे लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा सभी डिवाइडरों को नए सिरे से डेवलप किया जा रहा है। उनके बीच में पर्यावरण के अनुकूल हरे भरे रहने वाले पौधे लगाए जा रहे हैं। कुंभ मेले के निर्माण कार्यों की शुरुआत में सैकड़ों पेड़ों को काटने से पहले विरोध शुरू हो गया था। नगर निगम हरिद्वार के ब्रांड एम्बेसडर और ग्रीन मैन के नाम से मशहूर पर्यावरण प्रेमी विजयपाल बघेल ने बताया गंगनहर किनारे नए गंगा घाटों को बनाने के लिए करीब 800 पेड़ काटने का एक प्रस्ताव सिंचाई विभाग की तरफ से गया था। जिसका हमने बहुत विरोध किया। विरोध दर्ज कराने के बाद पेड़ काटने का निर्णय वापस लिया गया. अब करीब 50 पेड़ काटे गए. बाकी सब पेड़ एडजस्ट किए गए हैं।
काटे गए पेड़ों की भरपाई के लिए बैरागी कैंप और अन्य स्थानों में नए पेड़ लगाए गए हैं। ग्रीन कुंभ के लिए पेड़ लगाने का निर्णय स्वागत योग्य है लेकिन पेड़ लगाने के साथ साथ पर्यावरण और मां गंगा की स्वच्छता का ख्याल भी मेला प्रशासन को रखना होगा। अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय मीडिया संयोजक और नया अखाड़े के महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने मेला प्रशासन द्वारा हरियाली को प्राथमिकता दिए जाने की योजना का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि कुंभ मेले के आयोजन के बीच हरिद्वार को हरा भरा बनाने का संकल्प तभी पूरा होगा जब, लगाए गए पौधों को पेड़ बनने तक की जिम्मेदारी तय होगी। सभी अखाड़े और धार्मिक संस्थाएं इसमें सहभागिता करेंगी, लेकिन पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी भी तय करनी होगी, तभी हरा भरा हरिद्वार का संकल्प पूरा होगा।
