सरकारी अस्पताल की लैबों को फिर से ठेके पर देने की तैयारी, आंदोलनरत टेक्नोलॉजिस्ट भड़के
देहरादून। राजधानी देहरादून में बीते 135 दिनों से अपनी चार सूत्रीय मांगों को लेकर धरने पर बैठे मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्टों के सब्र का बांध टूटने लगा है। उन्होंने अब सरकार को बड़े आंदोलन की चेतावनी दी है।इसके साथ ही उत्तराखंड मेडिकल लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने सरकारी अस्पतालों की लैबों को फिर से निजीकरण किए जाने की तैयारी का विरोध किया है।
बुधवार को देहरादून में मेडिकल उत्तराखंड लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ ने कहा कि प्रदेश के प्रशिक्षित लैब टेक्नीशियन पिछले 135 दोनों से धरना स्थल पर अपनी मांगों के साथ आंदोलनरत हैं। इस दौरान उन्होंने एक बार सचिवालय और दो बार मुख्यमंत्री आवास कूच भी किया है। वहीं मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से भी मुलाकात की है। सीएम धामी ने उन्हें मौखिक आश्वासन भी दिया था, लेकिन अभी तक अधिकारियों ने उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया। उत्तराखंड लैब टेक्नोलॉजिस्ट संघ का आरोप है कि प्रदेश के प्रशिक्षित लैब टेक्निशियन और पहाड़ की जनता के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ हो रहा है। लैब टेक्नोलॉजिस्ट उत्तराखंड संघ के प्रदेश महासचिव मयंक राणा ने कहा कि मंत्री से लेकर मुखमंत्री तक के सामने उन्होंने अपनी मांग रखी, लेकिन किसी ने भी उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया। अब तो हालात ये है कि एनएचएम (राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन) की निविदा निकालकर प्रदेश के सरकारी हॉस्पिटलों में लैब्स का निजीकरण किया जा रहा है, जिसका ख़ामियाज़ा प्रदेश की जनता को भुगतना पड़ेगा।
मयंक राणा ने साफ किया है कि यदि 20 दिनों के भीतर उनकी मांगों पर कोई विचार नहीं किया गया तो वो मुख्यमंत्री आवास का कूच करने को मजबूर होगे। मयंक राणा ने कहा कि सरकारी लैबों को सुदृढ़ करने और सभी जांचें इन-हाउस कराने के लिए पहले समिति गठित की गई थी। इसके बावजूद प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के बजाय अब सरकारी लैबों को फिर निजी एजेंसियों के माध्यम से संचालित कराने की तैयारी की जा रही है।
संघ ने सवाल उठाया कि जब सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की बात हो रही है तो नियमित पदों पर नियुक्तियां करने के बजाय लैबों को ठेके पर क्यों दिया जा रहा है। संघ ने एक बार फिर से अपनी मांगों को दोहराया है और कहा कि यदि सरकार उनकी मांगों की अनदेखी करती है तो उन्हें बड़ा आंदोलन करने के लिए मजबूर होना पड़ेगा।
